बोलकर हिंदी निबंध कैसे लिखें? माइक की इजाज़त, भाषा का चुनाव, साफ़ डिक्टेशन की आदतें, गोपनीयता की सच्चाई और ईमानदार सीमाएं — आवाज़ से टाइपिंग की इस रहनुमाई में दर्ज हैं।
लखनऊ का एक नौजवान सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। हिंदी निबंध लिखना उसके लिए ज़रूरी था, लेकिन कीबोर्ड पर हिंदी टाइपिंग उसकी रफ़्तार से आधी थी — सोच आगे भागती, उंगलियां पीछे रह जातीं। एक दिन उसने माइक दबाकर बोलना शुरू किया और देखा कि उसके कहे शब्द स्क्रीन पर लिखते जा रहे हैं। निबंध का पहला ड्राफ़्ट आधे समय में तैयार था। उसके बाद से उसकी तैयारी का तरीका ही बदल गया: पहले बोलकर ड्राफ़्ट, फिर बैठकर सुधार।